जब तड़पती है आत्मा...

By: Divye Mittal

जब तड़पती है आत्मा हमारी कुछ केहने को,
और कोई शख्स नहीं होता हमें सुनने को,

तब सुनता है भगवान हमारी,
एक एक शब्द जो दिल से निकले ,
वो जा कर टकरा जाते हैं नीले अम्बर पर 
और दस्तक दे देते हैं उसके दर।

होती है फिर तेज गर्जना घने बादलों की,
और टपक पड़ती है बूंदे धरती पर
एक सुख का संदेश लेकर ।

बस वही प्रमाण हैं हम अकेले नहीं।