उड़कर ये मेहमान आया (कोरोना विशेषांक)

By: Ekant Negi

उड़कर ये मेहमान आया, हैरान-सा क्यों है,

कोरोना है नाम इसका, परेशान-सा क्यों है।

 

मौत खड़ी देहली पर, आखेट की तलाश में,

अनजान साया तुझ पर, मेहरबान-सा क्यों है।

 

धरती से अम्बर तक, बस तेरी ही हुकूमत हो,

अपने ही आशियाने में, तू मेहमान-सा क्यों है।

 

वक्त के आईने में, खुद को कभी संवारा नहीं,

साँसों में घुटन-सी है, फिर पशेमान-सा क्यों है।

 

इस दर्द की दवा नहीं, न कोई निगाहबां यहाँ,

चहकता हुआ पंछी, आज बेजुबान-सा क्यों है।

 

कुदरत का फरमान यहां, नज़रअंदाज़ हुआ है,

'एकान्त' में सोचना यार, नाफरमान-सा क्यों है।