काश हम पहले मानव बन पाते 

By: anita sharma

अंतर्राष्ट्रीय बनने से पहले 
काश पहले  हम अपने अपनों  को तो  समझ पाते 
काश हम पहले मानव बन पाते 


आतुरता इतनी है सारे ब्रह्माण्ड को जानने की 
मानो बालक  का बाल हठ 
अंतर  मात्र इतना वै 
वो हठ  शुद्ध ,पवित्र  और स्नेह से ओतप्रोत 
और ये हठ  दम्भ , अहंकार और अभिमान से लिप्त 


जिज्ञासा जग जानने की इतनी 
अरे नादान कभी अपने ह्रदय में भी खोज करो 
शायद जो भावना , संवेदना  गूगल सर्च में न पा  सके 
वो पास बैठे किसी निर्धन की आस बनकर पा सको 

 महामानव तो तन बनोगे 
जब  सच्चे मानव बन पाओगे