अच्छा- बुरा

By: Dr Rashi Kesh नवजात

अच्छा -बुरा

ठोकर मारकर चल देते है,ह

म तब हर रिश्ते को,

उसके आंसुओ को देखते भी नहीं,

जब मन मे गुरुर भरा होता है।

जर्रे जर्रे में वो मुझको दिखता है,

इंसान का ईमान आज बिकता है,

अच्छा बुरा कोई नहीं होता,

वक्त उसे बना देता है ।।

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Dr Rashi Kesh डॉ रसिकेश "नवजात"