Krishna

By: Anand shriwastava

है मेंरा कोटि नमन  उन वेदधर्म के ज्ञानी को,

महापुरुष वो योगीराज श्री कृष्ण निराभिमानी को ।

चाहे कहे सकल-समाज मुझे मुरख खलकामी,

पर है हर्ष मुझे की मैं कृष्ण पथ का हूं अनुगामी ।

चाहे उठा लो ब्रह्मवैवर्त या भागवत का तुम ज्ञान दो,

जिस कृष्ण को महाभारत में पाया उस का कुछ प्रमाण दो।

हे आर्यपुत्रो तुम समक्ष अपने गीता का ज्ञान धरो ,

फिर रख हाथ हृदय पर अपने निज ये अनुमान करो।

जो ज्ञान के सागर करूणाकर सुपथ के अनुगामी थे,

फिर क्या मानोगे कृष्ण वही जग में बडे कामी थे।