तुम कहां जा रहे हो ?

By: Survee Kashyap

कर्मपाथ पर अडिग हूं

मैं भी एक पथिक हूं

कुछ वाकया झकझोरता

हिम्मत मेरी टटोलता

हर मोड़ नया रुख मोड़ता

दिलो दिमाग में गूंजता

तुम कहां जा रहे हो

जाना था कहीं 

अब तो खुद से ही टकरा रही हूं

अपनी हद में अपनी जिद्द में 

बस जीये जारही हूं