आजादी

By: Deepika shukla

जिंदगी की  राहों में कांटों पर चलने की आज़ादी,

 वहसी निगाहों को चीरकर निकलने की आज़ादी,

 तूफानों के भंवर में फंसे अधिकारों की आज़ादी, 

 "" तुम एक लड़की हो"" के शोर में दफन होती आज़ादी,

भीतरी दीवारों को खोखला करती हुई आज़ादी,

 मेरे जेहन में दीमक की तरह है आज़ादी,

 मैं हसूॅ,मैं रोउं,मैं झुमू,मैं सोचूँ  क्यों कैद हूँ जंजीरों में,

इठलाती ख्वाहिशों के समंदर में "तुम एक लड़की हो" के शोर में दफन होती आज़ादी.... 

एहसास जगा इक बाती के जलने से अंधियारे भी कम होते हैं, 

मैं लड़की हूँ के शोर को खूबसूरत बनाने की आजादी  ....मेरी आजादी।