मैं आजाद हूं

By: DeepShubha

मैं ज़िंदा हूं तो बेशक आजाद हूं

पर मुझे जीने के लिए सांस कितनी चाहिए

ये मुझे घूंघट में बांधकर

ज़माने के ठेकेदार बताएंगे

पर मेरी सांसों का महकना नहीं बांध सकते

क्योंकि ये मेरी सांसें हैं

चूड़ी से पाजेब-बिछिया तक

वो मुझे बेड़ियों में जकड़ाना चाहते हैं

पर नहीं जकड़ सकते क्योंकि

उन्होंने हथियार चलाने और मैंने

उन्हें श्रृंगार कर दिया

क्योंकि मैं आजाद हूं

वो मुझे व्रतों के नाम पर

पौरुष की दासी बनाने पर तुले हैं

पर सब व्यर्थ है क्योंकि

मैं आजाद हूं- "विचारों से" इसलिए

हर गुलामी में आजादी का जरिया ढूंढ लेती हूं