मेरे जज्बात

By: Deepika shukla

मैंने कब मना किया कि  तुम याद नहीं आते हो,                  बस मेरे जज्बात इजाजत न देते।       

हम सुनकर जब अपनों को र्दद से भर जाते  हैं,                   तब लग कर गले रोने को बस तुम याद आते हो।

हकीकत और ख्वाबो के बीच सिहरते हैं हम,                     तब तुम्हारा जहन्नुम और तुम भी प्यारे लगते हो।           

अक्सर अकेलेपन मे यूँ ही रोने का जी चाहता है,                 पर तुम भी कहाँँ  सामने आते हो।

उलझ कर रह जाती हूँ दिखावे के शोर मे,                            पर मेरी बेटी के खातिर तेेरी ये नफरत देख,                    तुमसे मोहब्बत करने को" मेरे जज्बात" इजाजत न देते।।