मेरी मासूमियत

By: Divyansh Narang

मैं बतलाता नही अपनी तकलीफें कोई मेरी ख़ामोशी समझे ऐसा शक्श मुझे क्यों नहीं मिलता
औरों के बाग़ हरे भरे देखता रहता हूँ कभी कोई फूल मेरे बगीचे में क्यों नहीं खिलता

अगर कोई दुःख दे मुझे तो उससे हसकर सह लेता हूँ
मेरी मासूमियत देख कभी किसी का दिल क्यों नही पिघलता