श्री चरणों की अभिलाष लगी

By: Madan Mohan Thakur

 

 

श्री चरणों की अभिलाष लगी,मेरे भाग जगे जो जीवन की !
अश्रुू भरेइन नयनों से निरखुं छवि को,भाग जगेजो केवट मैं बनुं!!
केवच ही बनुं श्री चरणों में,यह अभिलाषा है मेरे मन की!
अश्रूं से पखारू श्री चरणों को,मेरे भाग जगे जो केवट ही बनुं!!
जो मिल जाए मेरे प्रभु पथ में,उनको तो बिठालूं हृदय के रथ में!
मैं प्रेम सहीत निहारूं श्री चरणों को,भाग जगे जो केवट ही बनुं!!
मुझे मोह नहीं जग के वैभव का,जो आज मिले कल मिट जाएँ!
अनुराग बढे छण-छण श्री चरणोंमें,मेरे भाग जगेजो केवट ही बनुं!!