यूं मौन रहो जो तुम

By: Madan Mohan Thakur

यूं मौन रहो जो तुम!
थम जाएगी नदियों की धारा!
बदलेंगे रूख गगन में बादल भी!
ना आएंगे नील गगन में तारा!
हे मृदुभाषिनी अब बोल भी दो!
होंठों पर परे ताले खोल भी दो!!

यूं मौन रहो जो तुम!
बादल भी गरजना भूल परे!
मेरे अरमाणों पर बरछी शूल परे!
मेरे अँखियन में भय के धूल परे!
सच कहें हम प्रेम की पाती भूल परे!
हे प्राण प्रिय अपनी वाणी बोल भी दो!
होंठों पर परे ताले खोल भी दो!!