जय शिवशंभू

By: Mahendra Dwivedi

मेरे महाकाल कहते हैं दरिया नहीं, तुम समुन्दर ही बन जाओ!
हो चाहे जितनी प्रसिद्धि, ना करो घमंड, न खुद पे इतराओ! 
है अमृत की चाह दुनिया को, तुम तुम शिव बनो,विष ही पी जाओ! 
झुकेगी दुनिया कदमों मे होगी, तुम करो, कुछ करके तो दिखाओ!
रखो मन खुश, हृदय पवित्र, अज्ञान का तम तुम खुद से भगाओ!
आश हो, विश्वास हो , चहुदिश जिससे प्रकाश हो वो दीप कोई और नहीं, तुम बन जाओ
 मेरे महाकाल कहते हैं दरिया नहीं, तुम समुन्दर ही बन जाओ!
     - - - महेंद्र द्विवेदी ( Jamon)