गुले इश्क

By: Guru saran srivastava

उसका मुझे पता नही

पर मैंने उसे प्यार किया

उसने कभी कुछ कहा नही

ना मैंने कभी इजहार किया। 

एक तरफ उसकी बारात आ रही थी

उधर उठने वाला था मेरे अरमानो का जनाजा

एक तरफ खुशी दूसरी ओर गम ही गम था

कैसे किया ऐसे मंजर का दीदार। 

उसने मुझे अपनी झील सी आँखों मे

उतरने देने से कभी नही इंकार किया

फिर भी नही कह सकता

की उसने मुझे प्यार किया। 

इश्क मेरे लिए इबादत है

मैंने इश्क पर ऐतबार किया 

अब थक गई है आँखे मेरी

जन्म 2 उसका  इंतजार किया