तन्हा सफर

By: Guru saran srivastava

मै अकेले चल रहा था

जिंदगी के सफर मे

ठोकरे खाई गिरा

उठा फिर चल दिया ।

 

चलते 2 राह मे कोई मिला

कट गया संग उसके मेरा कुछ सफर

करवट लिया फिर मेरे नसीब ने

हम बिछड़ गए आकर एक मोड पर ।

 

प्यार के  बाबत मै पढ़ता ही रहा

प्यार की बरसात कर रहा आसमां

पर मै तरसा एक बूंद के लिए

यू तो जिन्दा हू पर हर  लम्हा मरता ही रहा ।