सफल होने की चाह

By: Pramod Kumar

जीवन में आगे बढनेवाले कभी न देते किसी को उपालंभ। 

विषम स्थितियों के बावजूद ..वे कठिन कार्य करते प्रारंभ। 

श्रेयस कार्य को करने वाले भाग्यरेखा खुद खींचते हैं। 

अलग मार्ग पर चलते हुए उन्नतकर्म लकीरें भींचते हैं।।

यदि कोई असफल होता है तो सिर्फ अपनी गलती से।

जीवन में कोई आगे बढ़ता तो निजकर्म की चलती से।।

उत्तम कर्म-क्षीर क्षीण होकर क्षति हो जाता घमंड में। 

24 कैरेट सोना भी नही फिट हो पाता किसी मंड में।।

जो आगे बढ़ने को ठान लिया उसके लिए सर्वत्र राह है।

सफल वही हो सकता जिसे सफलता पाने की चाह है।।