एक सफ़र

By: Mohammad sarim

एक सफ़र शुरू कर के ख़तम करा है,
तुझे एहसास नही तुझे कितना प्यार करा है,

मोहब्बत ज़िन्दगी है ज़िन्दगी का हिस्सा नहीं, 
इसलिए जिससे करा है ज़िन्दगी भर करा है,

पता है बेचैनी भी मोहब्बत सिखाती है,
अब तो लगता है मेरी तकलीफ और बढाती है,

सब मिटा देने से लगता है सब मिटा है,
अच्छा खासा ताल्लुक़ चाहकर बेकार करा है,

एक आंसू ही नहीं निकालूंगा वादा है,
लगा होगा कहाँ मोहब्बत ज़्यादा है,

अफ़सोस मत कर सारिम तक़दीर ने ये भी लिखा है,
सुना यही है तक़दीर का लिखा कहाँ मिटा है