गुलाब और मोरपंख

By: aishwary raj

गुलाब और मोरपंख

मैं तुम्हें कभी गुलाब नहीं दूँगा

किताबों में पड़े गुलाब सूख जाते हैं

और जैसे-जैसे वो सूखते हैं

सूखता जाता है आपस का प्रेम 

मुझे गुलाबों के सूखने से डर लगता है

हाँ कभी मौका मिला तो

मैं जरूर दूँगा तुम्हें मोर का एक पंख

उसे संभाल के रख लेना

प्रेम की किताब के एकदम बीचोबीच 

मोर के पंख कभी सूखते नहीं 

बचपन में सुना था

किताबों में मोर का पंख रखने से

अच्छी रहती है याददाश्त

और तुम्हें भूलने की आदत भी बहुत है |||