दोनों के बीच दूरियां बढ़ी

By: Purnendu Ghosh

 

जब दूरियां बढ़ती हैं
ढीले पड़ जाते हैं कुछ बंधन
ऐसे समय, द्रौप दी ने अनुभव किया
अपने अंदर चल रहे एक बंधन को
मातृत्व की सुचना ने
दोनों के बीच दूरियां और बढ़ाई
समयानुसार, द्रौप दी मां बनी
उसकी बेटी उसकी सर्वस्य बनी
जकड़ने लगी द्रौप दी बेटी को
मुट्ठी में बालू की तरह
उसे लगा, मुट्ठी खोल देगी
बालू बिखर जायेगी
क्या कोई कैद कर रख पाया है
मुट्ठी में बालू को
क्या कोई भींचकर रख पाया है
सुगंध कैद कर, हथेली में...

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