मैंने सीखा

By: Aditya Kumar Mandal

मैंने जिन्दगी से हारना नहीं सीखा,

न कभी किसी से मुख मोड़ना सीखा।

अपनों का साथ छोड़ना नहीं सीखा,

न कभी मौत से डर कर भागना सीखा।

 

मैंने जिन्दगी को सही ढंग से जीना सीखा,

मैंने अपना अलग पहचान बनाना सीखा।

अपने हो या पराये सबका साथ निभाना सीखा,

दु:ख हो या सुख सबको दोस्त बनाना सीखा।