अमर हो जाना

By: Kushal

क़ायनात होना, शहर होना, घर हो जाना
किसी शायर को चाहना,और अमर हो जाना

ठहर ना जाऊँ कहीं किसी मोड़ पर जाकर
मेरी जाँ मंज़िल मत होना,तुम सफ़र हो जाना

मिल कर मुझे बचा लेना, काफ़िर होने से
कि तुम उपवासों का मेरे,असर हो जाना

ये एक राज़ है जाना, मेरे साथ रहने का
जो हो ना सको राहत तो फ़िकर हो जाना !!

        -कुशल