लघुकथा-रहस्य

By: Omprakash kshatriya prakash

लघुकथा- रहस्य   
“ इसी व्यक्ति के साथ बापू गया था . यह कह रहा था कि हम खूब पैसे कमाएंगे . बापू ने भी कहा था कि समुद्र से खूब मछलियाँ पकडूँगा . फिर ढेर सारा पैसा ले कर आऊंगा.” कहते हुए मोहन ने फोटो इंस्पेक्टर को दिया, “ साहब ! मैं वापस समुद्र के किनारे गुब्बारे बेचने जा रहा हूँ. शायद बापू या ये व्यक्ति मिल जाए.” कहते हुए मोहन  जाने लगा तो इंस्पेक्टर ने कहा, “ बेटा ! इसे देख ले. ये कौन है ?”
क्षतविक्षत फोटो में अपने बापू की कमीज पहचान कर मोहन के चीख निकल गई, “ ये तो मेरा बापू है साहब. इसे क्या हुआ ? इस की छाती और गुर्दे पर ये कटे हुए के निशान क्यों है साहब ? ”
इंस्पेक्टर क्या जवाब देता, उसे भी पता नहीं था कि क्या हुआ, “ ये छोटीछोटी मछलियाँ पकड़ने गया था, पर लगता है इसे ही बड़ी मछलियों ने अपना शिकार बना लिया है.”
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०७/०८/०२१५