अकेले - अकेले

By: Pranchal Gupta

बन्दे! कहाँ चल दिया

अकेले-अकेले?

समसान तक ही जाना है,

ठहर जा जरा,

कुछ यार साथ ले ले |

सफ़र बहुत लम्बा है,

थक जाएगा तू,

चलते अकेले-अकेले |

जिन्दगी की राहों में,

मुश्किलें कई आयेंगी,

बैठ जाना कहीं,

किसी किनारे पर,

अपने यारों के साथ,

गिरते संभलते |

जिन्दगी का मजा,

दुगना हो जाएगा,

जब यादों का कारवां

बनता चला जाएगा |

वो यादें ही होंगी,

जो तेरे साथ जायेंगी,

तेरे जाने के बाद भी,

तुझे जिन्दा रख पाएंगी |

ठहर जा जरा,

कुछ यादें बना ले,

कहाँ चल दिया

अकेले अकेले ||