कविता :- मैं खुश हूँ ।

By: sumita kanwar

मैं  खुश  हूँ ,

कि  तुम  मेरे साथ  नहीं ।

अगर  होते ?

तो  शायद  मैं  ना  होती !

तुम  सोचते हो 

कि  मैं  परछाई  हूँ ?

तुम  देख  नहीं  सकते !

आज  उस  मुकाम  पर  हूँ ।

मैं  खुश हूँ, 

कि  आज  मैं  अकेली  हूँ ।

पर  लोगों  के  दिलों में 

अब भी  बसती  हूँ ।

मैं  खुश हूँ ,

कि  अब  कोई  न  पूछेगा ,

नाम  मेरा ?

ना  ही  अब  पता  मेरा 

पुराना  होगा !

हर  पल  जीने का  होगा ।

तेरे  संग  बिताने का 

अब  कोई  पछतावा  ना  होगा ।

इसीलिए  मैं  खुश  हूँ ।