Naqaab

By: Ashish Tatla

निकलते ही बाज़ार में
मोल-भाव जुबां पर आ जाता है
करें भी तो क्या ज़नाब
ये इंसानी फ़ितरत
है ही कुछ ऐसी
न बोले तो बात
दफ़न दिल में होती नहीं
और बोल दे तो नक़ाब
चेहरे से उतर जाता है