विष वमन

By: Umesh Shukla

विष वमन                     विष वमन कर जो राख कर रहे देश का चैन औ अमन. उनको कभी न माफ करेगा वीरों का ये वतन. लाखों के प्राणोत्सर्ग से मिली थी देश को आजादी. बलिदानों को बिसरा कर कुछ लोग बो रहे बर्बादी. कुछ को जज्ब नहीं हो रही देश की बढ़ती साख. इसलिए वो सब कर रहे अमन चैन को राख. मायावी अंदाज में कर रहे हैं वो गलत प्रलाप. अपने कुटुंब को हैं वे मानते सेक्युलरिज्म का बाप. देश के लोगों को हरदम करते रहे गुमराह. निज कुटुंब छवि की सदा करते रहे परवाह