नफरत

By: Umesh Shukla

नफरत के शोले वे भड़़काए जा रहे हैं. हर बात को बतंगड़ बनाए जा रहे हैं. बोएंगे जिस फसल को उसे काटना भी होगा. सोचे बिना इस सत्य वो जहर बोए जा रहे हैं.सियासत की चालें देख हैरान है जमाना. बिन ताल सुर के छेड़ें नेता अटपटा तराना. दिग्भ्रमित सियासत और नेता बदगुमान.ऐसे में फिर बचेगा कैसे लोकतंत्र का मान