Poetry

By: Somya Tiwari

एसी वाली गाड़ी में बैठ,देर रात घर लौटते,कुछ ऐसा देखा,

और मैं सिहर गई,खेत में नहीं आज फुटपाथ पर सोता

#हल्कू देख रुक गई जबरा तो नहीं... हाँ फुटपाथ पर सोते

उन लोगों को गर्माते साथी कुत्ते देखे,दांत किट-किटाती सर्दी में

वो एक दूसरे का सहारा बने थे,सिकुड़ कर सोये ठण्ड 

उसके शरीर को गर्माता,खुद को बचाता सर्दी का

खिर कौन किस का आसरा ले रहा है?

स्वयं को बहुत कोसा...उसकी दशा से पीड़ित सी महसूस कर

अपनी शाल उढ़ा कर चली आई,पर एक...को!!!!

आँखों में अश्रुधार और प्रश्न लिए चली आई

किसी को क्यों नहीं दिखता ये हल्कू....???