(CHHAPAAK (छपाक) ANTHEM) अब लड़ना है

By: sandeep kajale

ज़िन्दगी झुलजती ना रहे

किसीका अन्याय हम ना सहे

 

बुझ जाये ये अंधेरी रात

कहने दो हमे हमारी बात

 

तोड़ देनी है सारी जंजीरे

फेंक देनी है धोके की खंजीरे

 

बदलेंगे सब, रहेंगे साथ

नहीं लौटना है खाली हाथ

 

हम करेंगे अपना इन्साफ

दुश्मन नहीं होंगे माफ़

 

कोई ना चेहरा, हमारा बिगाड़े

ना लहराता आँचल फाड़े

 

रहे हमारी गरिमा सलामत

वरना, हम भी करेंगे बगावत

 

देखनी है एक सुबह नई

सपने भरे हो इनमें कई

 

आगे एक कदम बढ़ना है

खुद के लिए हमे, अब लड़ना है

                        अब लड़ना है