Main thak chuka hu ab

By: Saikumar

मै थक चका हूं अब
खुदके खुशी का  गला घोट
अब दूसरों के लबों से मुस्कुराता हूं।
अपनों से फासला बनाते हुए
गैरों के करीब जा रहा हूं।
मुश्किलों से मुंह मोड़ते हुए
आसान रास्ते चुन रहा हूं।
सच्चाई से  मुंह छुपाते हुए
झुटी ज़िंदगी जी रहा हूं।

मै थक गया हूं अब
बादलों को देखते देखते
ना जाने कब जमीन भूल गया ।
मकान मैं रेहते रेहते
ना जाने कब घर भूल गया।
शहरों से नाता जोड़ते जोड़ते
ना जाने कब गांव भूल गया।
लाइट लगाने की आदत ने
सूरज को भूल दीया।

मै थक चुका हूं अब
ग़लत रास्ते पर  भागना आ गया
पर सही रास्ते पर चलना किसीने सिखाया ही नही।
चीटिंग से मार्क्स लाना आ गया
पर पढ़ाई करना किसीने सिखाया ही नहीं
पथरों की पूजा करना आ गया
पर लोगों में भी भगवान होता है किसीने बताया ही नहीं