Darr to lagta hai

By: Poonam Sharma

क्या  करु डर तो  लगता  है , कैसे  बड़ाऊ वो एक कदम , अपनी  मंजील  की ओर  खुदसे  ही डर  लगता  है . लड़  रहा  हू  अन्दर जो  तूफान  है  भवानाओ  की  काष्मकश  का .  ऐसा  क्या  है , जो  पिछे  धकेल  रहा है . क्या  करु  मंजिल  सामने  खडी  है , इसलिये उस  दूरी  को  कम  कर  रहा  हू , लड़  रहा  हू  आगे  बढ  रहा हू .