तुम्हें खो सा दिया है

By: akash kumar

 

वो हम अब हम नहीं रहे
जो चाहते थे हम होके हम होना
अब वो कल से डरने लगे है
जो तुम्हें ना चाहते थे खोना

तस्वीरों मे साथ है
जो तस्वीर अब भी मुझसे ख़फ़ा है
जिन हथेलियों मे हम हमरा तुम्हारा नाम लिखा करते थे
अब उन हाथो की लकीरें हमसे ख़फ़ा है

अलग होना पडा मुझे मेरी मोहब्बत से
मोहताज हू मैं इश्क का रब से जो उसने मुझे ये सिला दिया है
अब ना बोलने को ना लिखने को बाकी ही रहा
क्यूंकि
शयद
मैंने तुम्हें खो सा दिया है