ख़्वाब

By: Prachi Sachdev

कुछ ख्वाबों की उम्र, नहीं होती ज़्यादा,

आँखों में जन्म लेते हैं, पलकों पे दम तोड़ देते हैं...

कुछ पल को सोग मना लेते हैं हम भी,कु

दिन मौन होकर गुज़ार लेते हैं, 

फिर अंदर ही अंदर दिल के किसी कोने में,

दफ़न ख्वाबों को कर देते हैं...

बस यूँ ही दिल को मना लेते है, समझा लेते हैं,

नम आंखों में सैलाब थाम लेते हैं,

क्योंकि हम जानते हैं..

कुछ ख़्वाबों की उम्र, नहीं होती ज़्यादा,

आँखों में जन्म लेते हैं, पलकों पे दम तोड़ देते हैं...!