ज़िन्दगी बीत जाएगी तब मिलोगे क्या

By: Suraj Singh

ज़िन्दगी बीत जाएगी तब मिलोगे क्या,
इंतेज़ार नही होता कल मिलोगे क्या।

सफर-ए-मुकाम हासिल नही मुहब्बत में,
गम इस गली है अगली गली मिलोगे क्या।

रात तो बीत जाती है देर सवेर ही सही,
सो जाऊ गर तो ख्वाब में मिलोगे क्या।

तेरा यूँ चले जाना खलता है वक़्त बेवक़्त,
ये बताओ अपनी मंज़िल पर मिलोगे क्या।

हाल ये रहा वक़्त का होश नही इंतेज़ार में,
दोपहर हो चुकी है शाम को मिलोगे क्या।

'सूरज' जलता है तेरी मेरी नज़दीकियां देख,
तुझे ऐतराज़ नही तो चाँद पर मिलोगे क्या।