मुझपे जो गुज़री है, एक दिन गुज़ार के तो आ।

By: Suraj Singh

मुझपे जो गुज़री है,
एक दिन गुज़ार के तो आ,
रोज़ तू जीतता है,
एक दिन हार के तो आ।
बात इतनी सी थी,
के बात कुछ भी नही,
एक बार आने से क्या,
हर बार तो आ।
नसीब में जो लिखा,
वो तक़दीर बन कर आ,
जो उतरे न सुबह तलक,
वो खुमार बन कर आ।
सो चुका हु मैं,
एक ज़िन्दगी लेकर,
तू ख्वाब बनकर आ,
बेशुमार जमकर आ।