सुकून की तलाश

By: YOGITA

हर दिल को है एक सुकून की तलाश

बेजान शरीर मे , डाल दे जो जान

है कहीं कुछ कमी सी

मुसाफिर को तलाश हो जैसे मंजिल की |

धूप मे चलते चलते थक जाते हैं कदम

मिल जाए छाँव तो लगता, सांस लें लें दम भर

सोचते सब होकर के बेताब

कभी तो पूरी होगी उनकी  ये तलाश |

आएं वो पल जिनमे हम, सदियाँ जी लें

नशे के घूंट बेपरवाह पी लें

अधूरी सी लगती इस जिंदगी को

शायद मुकम्मल कर लें |