'क्या पाओगे '

By: Devesh

हर चीज को पैमाने पे नापके क्या पाओगे
इश्क़ है पाक चीज, मिटा के क्या पाओगे

इस बेरुखी से अच्छा तो नफरत ही कर लेते
मुझ गुमनाम को भुला के क्या पाओगे

मिलन की बात नहीं की मैंने, दीदार से जी लेता.
अब मुझसे दूर जाके क्या पाओगे

बरबाद तो पहले से थे हम,बस पर्दा लगा दिया
मुझ लाचार को बरबाद करके क्या पाओगे

मंजिल का शौक मुझे भी है,लड़ रहा हूं
इस हारे हुए को हरा के क्या पाओगे।

-देवेश 'अल्पज्ञ'