जिंदा हूं

By: देवेश 'अल्पज्ञ '

मै तब भी जिंदा था अब भी जिंदा हू
उसकी मुस्कान देख लू एक बार इस इंतजार में जिंदा हू
तोहफे तो खूब मिलते होंगे उसे,खुसनसीब जो है
कभी सपनों में ही तोहफा दे दू,इस इंतजाम में जिंदा हूं
मिलन को प्यार बोले तो राख हू मै
यादों को संजोना ही प्यार है ,इस फिराक में जिंदा हूं।
दुनिया तो हसती ही है दूसरो के रोने पर
उसने होठ तक नहीं हिलाए ,इस एहसान में जिंदा हूं
ये कस्मे वादे तोड़ना छोटी बाते है,चलता है
उसने कसमें तो खाई थी, इस फरहान में जिंदा हू।

-देवेश 'अल्पज्ञ'