मेरे दिल की ज़ुबानी

By: Preetesh Mishra

हर रात कि तन्हाई में ये दिल रोता है,
सपने जो कभी अपने थे, ये उनको खोता है..

यादों कि बारात फिर सजने लगती है,
धीरे धीरे ये रात यूं कटने लागती है..

ख़ामोशी से गुफ्तगू करने लगते है हम,
आपकी बेरुखी कि वजह पूछते है हम..

एक अदा से वो हमे तकदीर के आंचल में छोड़ जाती है,
दिल में दर्द और आंखों में नमी छा जाती है..

फिर आंखों में लिए आंसू, हम करवट बदल लेते हैं,
तेरी याद के सहारे एक और रात जी लेते हैं ।।