मेरे अल्फाज

By: हेमंत यादव

वो रोज जाती है

उसके घर की ओर

पर वापिस लौट आती है

घर के दरवाजे तक जाकर

वो भागती है फिर

उस अकेले शांत 

तालाब की ओर

जहां दोनों 

बैठकर 

उसमें कंकड़ फेंकते

ओर जिसका कंकड़ सबसे

दूर जाता

वो उसकी गोद में सिर रख

सोता 

ना जाने इस तरह 

उसने कितनी ही बार

उसे अपनी गोद में

सुलाकर

उसके बालों को सहलाया है

पर आज भी वो

वहां रोज आती है

उसके जाने के बाद भी

उसके दरवाजे तक जाकर

वापिस उसी तालाब की ओर

भागती है

क्यूंकि‌‌ कहां था उसने

जब  लौटकर आऊं तो 

यही मिलना