क्या वाे कम है

By: R.Gyankusum

ऐ जिन्दगी तूझे क्या गम है

जो है तेरे पास क्या वो कम है

तारो भरी आसमा की चादर,धरती रूपी बिस्तर है

फूलो की रंग बिरंगी महकती कलिया,

विशाल वृक्षो की छांया है,पंक्षीयो की फर- फराहट है

चिड़ियों की चैं-चहायट है,इठलाती बलखाती नदीयां है

पर्वत बनें रक्षक है, पगली बहती पवन है

रातें भी चम-चम है,सूरज की रोशनी है

चांद की शीतलता है।

दिन में रोंशनी की जगमगाहट है,सुन्दर नाचती तितलियां,मोर है

संगीत के मधुर सुर है,बारिश की छम-छमाहट है

झरनों की सरगम है,चारों तरफ सुन्दर नजारा है

जिस से बना जीवन उपवन सारा हैं।

             ---आर.ज्ञानकुसुम