"मजदूर नहीं मजबूर'

By: Meenakshi Saxena

 

मजदूर नहीं मजबूर है हम,
जिंदगी से बहुत दूर है हम।।

जब काम पड़ा तो तुम्हारा हिस्सा हो गए...
आज काम नहीं है, तो फालतू का किस्सा हो गए।।

अजीब सी रीत है इस जमाने की,
रोटी उसी के पास ज्यादा है जिसे कद्र ही नहीं खाने की।।

न जाने कब जिंदगी पैसों से सस्ती हो गई,
और जिसके पास पैसा है वो बड़ी बड़ी हस्ती हो गई।।

तुम्हारी ही तरह इंसान है हम,
अरे हमारी भी सुन लो बहुत परेशान हैं हम।।