गुजरती तन्हाईयाँ तलाश करता हूँ 

By: Ekant Negi

अजनबी लोगों की भीड़ में
गुजरती तन्हाईयाँ तलाश करता हूँ 
सनसनाती हवा के झोंकों में 
मचलती शहनाईयां तलाश करता हूँ
चेहरों की बेजुबान लकीरों में 
गुमनाम खामोशियाँ तलाश करता हूँ 
उजड़े मयखाने की दीवारों में 
अनजान मदहोशियाँ तलाश करता हूँ 
आसमां में पतंग उड़ाकर 
अनछुई ऊंचाईयां तलाश करता हूँ 
समंदर को निचोड़कर 
असीम गहराईयां तलाश करता हूँ
बचपन के आँगन में 
मासूम नादानियाँ तलाश करता हूँ
ढलती हुई साँझ में 
दिन की निशानियां तलाश करता हू
अतीत के धूमिल पन्नों में 
इश्क की परछाइयाँ तलाश करता हूँ 
काल के कापाल पर बैठी 
गुमसुम परेशानियां तलाश करता हूँ