सीरत बदलनी चाहिए।

By: Arjuna Bunty

सीरत बदलनी चाहिए।


कभी ना कभी इस कृति की
सीरत बदलनी चाहिए!

जो बदलाव लाना है
उस बदलाव की सूरत बदलनी चाहिए!

इंसान है भगवान नहीं
तो इंसानों की अपनी-अपनी कीमत बदलनी चाहिए!

सिक्के तो अपनी खनक से बदहाली बताते हैं
नोटों जैसी अपनी हैसियत बदलनी चाहिए !

कोई कम नहीं आंकें, मुझे मेरी बनावट से
मेरी क्या जरूरत है
वो जरूरत बदलनी चाहिए !

है कोई चंदन और कोई कुंदन
अपनी अपनी हस्ती है
बस अहमियत बदलनी चाहिए!

कभी ना कभी इस कृति की
सूरत और सीरत बदलनी चाहिए ।
Arjuna Bunty.