तु बहती नदी प्यार की

By: niranjan

तू बहती नदी प्यार की,
          मैं दरिया पर बैठा तेरा प्रेम प्रिय।
तू चंचल सी बहती लहरें,
         मैं करता तेरा दीदार प्रिय।
हंसती रहती है कलकल से बहती है,
     घायल कर जाती है तेरी हर मुस्कान प्रिय।
तू पंखुड़ी गुलाब की,
       मैं तेरे बगीचे का माली प्रिय।
तोड़ ना ले तुझे मेरे बाग से कोई,
      बस में करता तेरी रखवाली प्रिय।
पा लूंगा तुझे एक दिन में,
    बस ख्वाब यही सजाता हूं प्रिय।
     

          निरंजन