Zindagi ka safar

By: Fehmida khatoon

ज़िन्दगी का सफ़र है अधूरा हमारा
मंज़िल है कहीं मीलों दूर हमारी
कुछ नहीं से बहुत कुछ बन्ना बाक़ी है हमारा।
पंखड़ी की तरहा हवा के रुख की ओर उढते चले जाना हैं,
चींटी की तरहा मेहनत करते रहना हैं,
जुगनू की तरहा अंधेरे सफ़र में भी चमकते रहना हैं,
मकड़ी की तरहा बिना हार माने कोशिश करते रहना हैं.,
बड़े से बड़े तूफान में भी चिड़िया की तरहा उम्मीद जगाए रखना हैं,
चाँद और सूरज की तरहा अपने अपने वक़्त पर चमकते रहना हैं,
हाँ! ज़िन्दगी का सफ़र अभी हैं अधूरा हमारा।