रीत ज़िन्दगी की..

By: Fehmida Khatoon

हानि लाभ की बात नहीं....,
सही गलत का साथ नहीं.....,
अच्छे बुरे की तुलना नहीं हैं....,
बल्कि कभी कभी अपने फर्ज़ को निभाने के ख़ातिर अपने बनाए सीमाओं को भी पार कर जाना पढ़ता हैं....,
चाहे हमें सही लगे या ग़लत...... ।
अच्छा लगे या बुरा..... ।
इससे कोई फ़र्क़ नहीं पढ़ने वाला.. ।।
यही ज़िन्दगी की रीत होती हैं....।।