दिहाड़ी मजदूर

By: Vishakha mk Singh

हर पथ- लतपथ ,लगभग लहु-जल
विस्मित विचित्र, विकट विरूपा
संशय सानिध्य, सक्षम सरूपा
है प्रत्यक्ष मनु एक स्वरूपा
श्रम की शक्ति है स्वयं भरोसा
दिहाड़ी मजदूर मनु है हम रूपा!

पर्बत पाट ,पथ बनाता 
है निज़ भूख मिटाता
विस्मित हो क्षुद्रा को देखा
अनगिनत आंसू ,अथाह आशा
आत्मसंतोष असहाय, अविश्वास अधिकाय
भूख भार,भस्म भागीरथ
 पर से उठा भरोसा
दिहाड़ी मजदूर मनु है हम रूपा!