समय का पहिया

By: Anupriya'anieya'

समय का पहिया बस चलता रहता है,

थकता, ना रुकता, ना ये बंद होता कभी।

समेटे ख़ुद में रेत के कणों की तरह हर पल,

समेट लिए जो आज कर्म लौटाता नहीं वो कल।

सोच लिया वो कर लेना बंदे तुम आज ही

कल बन जाएगा वो, जो है आज अभी।

समय का मारा राही भटक जाता हैं,

समय का साथी आत्मसात पा लेता है।

सत कर्मों के पथ पर चलता जा राही,

समय नहीं कर्म तो राही लौट कर आते हैं।

समय का रुख़ इक धारा में ही बहता है,

वो बस चलता है, बस आगे बढ़ता रहता