नारी……

By: Babita Mishra

नारी……

चुन चुन कर बागों से लकड़ी, देखो बनाया गठरी का ढेर..                    

अस्त होने लगा सूरज , चलो बहन अब घर की ओर..

दुनिया कहती नारी को कोमल, पर नारी क़हाँ है कमजोर..

माँ, बहन , बेटी, पत्नी कितने रूप, अनेक प्रकार..

सहकर अपनी प्रसव पीड़ा, है ये बच्चों कि सृज्जनकार..

भोर से लेकर रात तक ,रखे सबका ख़्याल..

नारी ही होती है, अपने परिवार की आधार ..

आओ नारी को दे सम्मान, प्रकट कर आभार…….

 

बबीता मिश्रा

विकास पूरी न्यू दिल्ली-18